Rajasthan GK

राजस्थान जीके हिन्दी में टॉपिक वाइज Rajasthan GK in Hindi Topic Wise राजस्थान का भौतिक स्वरूप राजस्थान की प्रमुख बोलियां राजस्थान के प्रमुख महल राजस्थान की प्रमुख झीलें राजस्थान की प्रमुख हवेलियाँ व छतरियाँ राजस्थान के लोक-नाट्य राजस्थान के प्रमुख सम्प्रदाय राजस्थान की प्रमुख लोक देवीयाँ  राजस्थान कें प्रमुख लोकदेवता राजस्थान के प्रमुख लोकनृत्य राजस्थान के प्रमुख …

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राजस्थान की प्रमुख दरगाह, मस्जिद एवं मकबरे मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाहः- यह अजमेर में स्थित हैं। इसे गरीब नवाज एवं सूफियों का सन्त भी कहते हैं। ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती मोहम्मद गौरी के साथ भारत आया था। उस समय अजमेर में पृथ्वीराज चैहान तृतीय का शासन था। इनके गुरू का नाम हजरत शेख उस्मान हारूनी था। …

Continue reading राजस्थान की प्रमुख दरगाह, मस्जिद एवं मकबरे | Rajasthan ki Pramukh Dargah, Masjide & Makbare

राजस्थान के प्रमुख मन्दिर राजस्थान के प्रमुख मन्दिर रणकपुर जैन मन्दिरः- इसे चैमुखा मन्दिर भी कहते हैं। यह भगवान महाविर का समर्पित हैं। यह पाली के रणकपुर में मथाई नदी  के किनारे कुम्भा के शासन काल में इसके मंत्री धारणशाह ने बनावाया था। इसका शिल्पी देपाक था। इसमें आदिनाथ की चैमुख मूर्ति स्थापित हैं। इसमें 1444 …

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राजस्थान की चित्रकला शैली की विशेषताएँ राजस्थान में चित्रकला की शुरूआत राणा कुम्भा के शासनकाल से हुई। राजस्थान का प्रथम चित्रित ग्रंथ “श्रावक प्रतिक्रमण सूत्र चूर्ण“  हैं। जिसकी रचना 1261 ई़ में मेवाड़ के तेजसिंह के शासन काल में हुई। राजस्थान की चित्रकला पर आनन्द कुमार स्वामी ने “राजपुत पेटिंग“ नामक पुस्तक में प्रथम बार …

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राजस्थान की प्रमुख हस्तकलाएँ जववहारात का कार्य ‘हस्तशिल्प’ की श्रेणी में आता हैं। राजस्थान की हस्तशिल्प वस्तुओं को राजस्थान लघु उधोग निगम राजस्थली ब्रांड के नाम से विपणन करता हैं। जो जयपुर में स्थित हैं। हस्तशिल्पियों को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से उदयपुर से दूर 13 किमी. शिल्पग्राम की स्थापना की गई। ‘हैण्डलूम मार्क’ शिल्पकला …

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 गवरी नाट्य इसे मेरू लोकनाट्य भी कहते हैं। मेवाड़ क्षैत्र के भील पुरूषों द्वारा किया जाने वाला एक लोक-नाट्य जो रक्षाबन्धन के अगले दिन से शुरू होता है जो अगले 40 दिन तक चलता हैं। यह नाट्य शिव-भस्मासुर की कहानी पर आधारित हैं। इसमें शिव को राई बुढ़िया तथा पार्वती को गवरी कहते हैं। हास्य …

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रामस्नेही सम्प्रदायः- इस सम्प्रदाय की चार जगह पीठ हैं। जिसमें प्रधान पीठ शाहपुरा भीलवाड़ा में हैं। इसके संस्थापक रामचरण जी थे, जिनका  जन्म सोड़ा ग्राम टोंक में हुआ था। शाहुपरा भीलवाड़ा में रामस्नेही सम्प्रदाय द्वारा फुलडोल महोत्सव का चैत्र कृष्ण एकम से चैत्र कृष्ण पंचमी तक मनाया जाता हैं। तथा इस सम्प्रदाय की अन्य पीठ …

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जीण  माताः- इनको शेखावाटी क्षेत्र की लोक देवी, मधुमक्खियों की देवी, चैहानों की कुल देवी आदि नामों से जाना जाता हैं। इनका जन्म चुरू जिलें के धांधु गाँव में हुआ। इनके मन्दिर का निर्माण पृथ्वीराज चैहान प्रथम के समय हट्टड़ द्वारा हर्ष की पहाड़िया पर करवाया गया। यहाँ पर ढाई प्यालें शराब चढ़ती हैं। तथा …

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घूमरः- इसे राजस्थान के नृत्यों की आत्मा, नृत्यों का सिरमौर तथा सामन्ती नृत्य कहते हैं। यह मुलतः मध्य एशिया का हैं। इस नृत्य को गणगौर पर महिलाओं द्वारा किया जाता हैं। इसमें हाथों का लचकदार सचांलन होता हैं। ढोल व नगाड़ा इसके मुख्य वाद्ययंत्र हैं। इसमें पुरूष नृत्य नहीं करते हैं लेकिन यह पुरूष प्रधान …

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राजस्थान की प्रमुख नहर परियोजना इन्दिरा गाँधी नहर परियोजनाः- इस परियोजना की आधारशिला 31 मार्च 1958 में रखी थी। सर्वप्रथम इसका तत्कालीन उपराष्ट्रपति डाॅ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने 1961 को नोरंग देसर (हनुमानगढ़) से छोड़ा। इस परियोजना का पुराना नाम राजस्थान नहर था। जिसे 2 नवम्बर, 1984 को बदल कर इन्दिरा गाँधी नहर कर दिया।  इसे …

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