राजस्थान की प्रमुख दरगाह, मस्जिद एवं मकबरे

मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाहः-

यह अजमेर में स्थित हैं। इसे गरीब नवाज एवं सूफियों का सन्त भी कहते हैं। ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती मोहम्मद गौरी के साथ भारत आया था। उस समय अजमेर में पृथ्वीराज चैहान तृतीय का शासन था। इनके गुरू का नाम हजरत शेख उस्मान हारूनी था। इनका जन्म संजरी (फारस) में हुआ था। इस सम्प्रदाय में गुरू को पीर तथा शिष्य को मुरीद कहते हैं। इनकी दरगाह बनाने का काम इल्तुतमीश ने शुरू किया था। तथा पूर्ण हुँमायू ने करवाया था। यहाँ पर प्रतिवर्ष रज्जब महीने के 1 से 6 तारीख तक उर्स लगता हैं। जिसका उद्घाटन भिलवाड़ा का गौरी परिवार करता हैं। इस दरगाह में जामा मस्जिद हैं जिसका निर्माण शाहजहाँ ने करवाया था।

अढाई दिन का झोंपड़ाः-

यह भी अजमेर में स्थित हैं। यह पहले एक संस्कृत पाठशाला जिसका निर्माण विग्रहराज चतुर्थ ने करवाया था। इसको तोड़कर यहाँ पर कुतुबुद्दीन ऐबक ने मस्जिद बनवाई। जो राजस्थान की पहली मस्ज्दि हैं। यहाँ प्रतिवर्ष पंजाबशाह पीर की याद में ढ़ाई दिन का उर्स लगता हैं। इसलिए इसको अढ़ाई दिन का झोंपड़ा कहते हैं। इसके बारे में ए. कनिघम ने कहा “भारत में कोई इमारत न तो ऐतिहासिक दृष्टी से और न ही पुरातात्विक दृष्टि से इतनी संरक्षित हैं।“

शक्कर बाबा की दरगाहः-

यह झुन्झुनू के चिड़ावा में स्थित हैं। इसे नवाब रूहेल खाँ का मकबरा भी कहते हैं। इनका लोकप्रिय नाम नरहड़ पीर हैं। ये शेख सलीम चिश्ती के शिष्य थे। जिसे बांगड़ का धणी कहा जाता है। यहाँ पर कृष्ण जन्माष्टमी पर लगने वाला मेला हिन्दू-मुस्लिम सद्भाव का प्रतिक हैं।

हम्मीमुद्दीन नागौरी की दरगाहः-

यह नागौर जिले में स्थित हैं। इसे राजस्थान का दूसरा ख्वाजा/तारकीन का उर्स/सन्नासियों का सुल्तान/ हम्मीमुद्दीन नागौरी आदी नामों से जाना जाता हैं। यहाँ राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा उर्स लगता हैं। इसे तारकीन साहब का उर्स भी कहते हैं। ये भी गौरी एवं मोईनुद्दीन चिश्ती के साथ भारत आये थे।

सैय्यद फखरूद्दिन नागौरी की दरगाहः-

यह डुँगरपुर के गलियाकोट में माही नदी के किनारे स्थित हैं। यहाँ दाऊदी बोहरा सम्प्रदाय का सबसे बड़ा उर्स लगता हैं। जिसे डूँगरपूर का उर्स भी कहते हैं।

शाहबाद मस्जिदः-

यह बांरा जिले में स्थित हैं। यह राजस्थान की सबसे बड़ी मस्जिद हैं। जिसका निर्माण मुक्तामन ने करवाया।

अन्य प्रमुख मस्जिदें, दरगाह एवं मकबरों का नाम एवं उनका स्थानः-

बड़े पीर की दरगाह = नागौर

कमरूद्दीन की दरगाह = झुन्झुनू

सफदरगंज मीनार = अलवर

अलाऊद्दीन आलम शाह का मकबरा = तिजारा-अलवर

खुदा बक्श बाबा की दरगाह = सादड़ी-पाली

पीर ढूल्लेशाह की दरगाह = केरला-पाली

मस्तान बाबा की दरगाह = सोजत-पाली

सैय्यद बादशाह की दरगाह = शिवगंज-सिरोही

जामा मस्जिद = मालपुरा-टोंक

रजिया सुल्तान का मकबरा = टोंक

शेख अब्दूल अजीज मक्की की दरगाह = बूँदी

मीरान साहब की मजार = तारागढ़ दूर्ग-अजमेर

फखरूद्दिन चिश्ती की दरगाह = सरवाड़-अजमेर

संत बादाम शाह कुरैशी कलन्दर की दरगाह =  सौमेलपुर-अजमेर

इक मीनार मस्जिद = जोधपुर

गमता गाजी मीनार = जोधपुर

गुलाब खाँ का मकबरा = जोधपुर

गुलाब कलन्दर का मकबरा = जोधपुर

गूलर कालूदान की मीनार = मेहरानगढ़ दूर्ग-जोधपुर

तना पीर की दरगाह = मण्डोर-जोधपुर

गुरूद्वारा बुढ्ड़ा जोहड़ = रायसिंह नगर-श्रीगंगानगर

अलाऊद्दीन खिलजी की मस्जिद = जालौर

मलिक शाह पीर की दरगाह = जालौर

भूरे खाँ की मजार = जोधपुर

हजरत मख्दून पीर की दरगाह = जालौर

अब्बनशाह अल्लेहीर्रहमा की दरगाह = साचैंर-जालौर

मुसलमान संत अब्दुल्ला पीर का मकबरा = बाँसवाड़ा

काकाजी पीर की दरगाह = प्रतापगढ़

मीठे शाह की दरगाह = गागरोन-झालावाड़

अली शाह पीर की दरगाह = दूदू-जयपुर

ईदगाह मस्जिद = जयपुर

नालीसर मस्जिद = साँभर-जयपुर

अकबर की मस्जिद = आमेर-जयपुर

उषा मस्जिद = बयाना-भरतपुर

बीबी जरीना का मकबरा = धौलपुर

पीर सदरूद्दीन की दरगाह = सवाईमाधोपुर

मर्दान शाह पीर की दरगाह = करौली

जामा मस्जिद = बाराँ

नेहर खाँ की मीनार = कोटा

मुफ्ती की मजार = कोटा

राजस्थान की प्रमुख मस्जिदें, मकबरों एवं दरगाह से सम्बन्धित महत्वपूर्ण प्रश्न

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