राजस्थान की प्रमुख झीलें

राजस्थान के मिठे पानी की झीलेंः-

फतेहसागर झील

इस झील का निर्माण जयसिंह ने उदयपुर के देवाली गाँव में करवाया। अतः इसे देवाली तालाब भी कहते हैं। इसकी आधार शिला ‘ड्युक आॅफ कनाॅट’ द्वारा रखी गई थी। बाद में बाढ़ से क्षतिग्रस्त होने पर फतेहसिंह ने इसका पुनः निर्माण करवाया।  इसके एक टापू पर नेहरू उधान हैं।  इसके पास सहेलियों कि बाड़ी  एवं एक सौर वेधाशाला स्थित हैं। फतेहसागर एवं पिछोला झील  को जोड़ने वाली झील “स्वरूप सागर “ हैं।

पिछोला झील

यह झील बेड़च नदी पर उदयपुर में स्थित हैं। इसका निर्माण 14वीं शताब्दी में राणा लाखा के शासन काल में एक चिड़िमार बंजारे ने अपने बैल की स्मृति में करवाया। इसमें सीसरमा एवं बुझड़ा नदीयां आकर गिरती हैं। इस झील में जगमन्दिर का निर्माण करणसिंह ने  1620 में शुरू किया तथा जगतसिंह प्रथम ने 1651 में पूर्ण करवाया। ताजमहल की वास्तुकला पर भारतीय भवन जग मंदिर पैलेस उदयपुर की वास्तुकला की छाप हैं। गुजरात अभियान के समय तथा  अंग्रेजो ने 1857 की क्रांति के समय शरण ली। इस झील में बीजारी नामक स्थान पर नटली का चबुतरा बना हुआ हैं। महाराणा प्रताप व मानसिंह की मुलाकत इसी झील की पाल पर हुई थी।

जयसमन्द झील

इस झील का निर्माण जयसिंह ने उदयपुर में गोमती नदी पर बाँध बनाकर करवाया। इस झील को ढेबर झील भी कहते हैं। यह भारत की दूसरी तथा राजस्थान की सबसे बड़ी कृत्रिम झील हैं। यह अन्तः प्रवाह की झील हैं। इसमें गोमती, झावरी एवं बागर नदियों का जल आकर गिरता हैं। इसमें कुल सात टापू हैं। जिनमें से बड़े टापू को बाबा का भागड़ा तथा छोटे टापू को प्यारी कहते हैं। इसके किनारे रूठी रानी का महल स्थित हैं।

पुष्कर झील

यह राज्य के अजमेर जिले में स्थित हैं। इसको हिन्दुओं का पाँचवा तिर्थ, तिर्थो का मामा, सबसे पवित्र एवं सबसे प्रदुषित झील भी कहते हैं।  इस झील को सर्वप्रथम पुष्कारणा ब्राह्यणों द्वारा खोदी जाने के कारण इसका नाम पुष्कर झील पड़ा। 1809 ई. में मराठा सरदारों ने  इसका पुनः निर्माण करवाया। इसके किनारे ब्रह्यजी का मन्दिर स्थित हैं। यह राज्य कि सबसे बड़ी मिठे पानी की प्राकृतिक झील हैं। यह झील ज्वालामुखी से निर्मित हैं। इसलिए इसे कालाडेरा झील भी कहते हैं। 1911 में मेडम मैरी ने यहाँ पर महिला घाट बनवाया जो गाँधी घाट कहलाता हैं। यहाँ पर कार्तिक पूर्णिमा में राज्य का सबसे रंगीन मेला लगता हैं। यह स्थान सर्वाधिक ऊँट बिक्री के लिए भी प्रसिद्व हैं।

आना सागर झील

यह राज्य के अजमेर जिले के नागपहाड़ व तारागढ़ के  मध्य स्थित हैं। इसका निर्माण अर्णोराज ने 1137 ई. में चन्द्रावती नदी के जल को रोककर करवाया।  जहाँगिर ने इसके पास दौलत बाग बनवाया। जिसे वर्तमान समय में सुभाष उधान के नाम से जाना जाता हैं। यहाँ पर शाहजहाँ 5 बारहदरी का निर्माण भी करवाया।

नक्की झील

यह झील माउण्ट आबू में स्थित हैं। जिसका निर्माण 14 वीं शताब्दी में किया गया। यह सबसे ऊँची एवं सबसे गहरी झील हैं। इसमें दो चट्टाने हैं, जिनकी आकृति टाॅड-राॅक (मेंढक के समान) नन राॅक(महिला के समान) जैसी हैं। किंवदती के अनुसार इसका निर्माण देवताओं ने नाखूनों से किया। राज्य की एकमात्र झील जो सर्दियों में जम जाती हैं। इस झील के किनारे सनसेट का दृश्य निहारने के लिए पर्यटक माउण्ट आबू आते हैं।

राजसमन्द झील

कांकरोली में राजसिंह ने 1600 से 1662 में इसका निर्माण करवाया।  इस झील में गोमती नदी का पानी आकर गिरता हैं। इसके उत्तरी भाग पर नौ चैकी पाल स्थित हैं जिस पर रणछोड़ भट्ट द्वारा संस्कृत भाषा में 25 खण्डों में शिलालेख लिखा हैं। जिसमें मेवाड़ का इतिहास लिखा हुआ हैं। इन्हें “राजप्रशस्ति“ के नाम से जाना जाता हैं। जो संसार कि सबसे बड़ी प्रशस्ति हैं। यह राजस्थान की दूसरी बड़ी कृत्रिम झील हैं।

फाॅयसागर झील

यह झील अजमेर जिले में स्थित हैं। इसका निर्माण इंजीनियर फाॅय के निर्देशन में अकाल राहत कार्य के तहत बांडी नदी पर बाँध बनाकर करवाया। इसमें अधिक जल भरने पर इसका पानी आनासागर झील में जाता हैं।

कोलायत झील

यह बीकानेर में स्थित हैं। यह एक प्राकृतिक झील हैं। जहाँ कपिल मुनी का मेला प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा को भरता हैं। यह झील राष्ट्रीय राजमार्ग-15 पर स्थित हैं। इसे शुष्क मरूस्थल का सुन्दर उधान भी कहते हैं।

सिलीसेढ़ झील

यह झील राष्ट्रीय राजमार्ग-8 पर अलवर जिले में स्थित हैं। इसका निर्माण विनयसिंह ने रानी शिला हेतु करवाया था जिसे राजस्थान का नन्दन कानन भी कहते हैं। वर्तमान समय में इसे होटल लेक पैलेस में तब्दील कर दिया गया हैं।

कायलाना झील

यह झील जोधपुर में स्थित हैं। शुरू में यह प्राकृतिक झील थी। जिसे वर्तमान स्वरूप सर प्रताप ने दिया।  इससे जोधपुर शहर को पेयजल दिया जाता हैं। वर्तमान में इस झील से राजीव गाँधी केनाल से पानी आता हैं। इसके किनारे माचिया सफारी पार्क स्थित हैं।

अन्य मिठे पानी की झीलें एवं उनका स्थानः-

अमर सागर झील, गढ़सीसर झील एवं बुझ झील = जैसलमेर

बुढ्ढा जोहड़ झील = श्रीगंगानगर

तलवाड़ा झील = हनुमानगढ़

रामगढ़ झील, गलता झील एवं मानसागर झील = जयपुर

जैतसागर झील, नवलसागर झील, कनकसागर झील एवं रामसागर झील = बूँदी

काँडेला झील एवं भीमसागर झील = झालावाड़

भोपाल सागर झील = चितौड़गढ़

गैव सागर झील = डूँगंरपुर

नन्दसमन्द झील = राजसमन्द

गजनेर झील = बीकानेर

मोती झील = भरतपुर

तालाब-ए-शाही झील = धोलपुर

किशोर सागर झील = कोटा

चैपड़ा झील = पाली

बालसमन्द झील = जोधपुर

उदयसागर झील, गोवर्धन सागर झील एवं फतेह सागर झील = उदयपुर

राजस्थान में खारे पानी प्रमुख झीलें

साँभर झील

यह झील जयपुर के फुलेरा गाँव में स्थित हैं। इसका कुछ भाग नागौर में भी हैं। अतः इसका प्रशासनिक कार्य जयपुर में किया जाता हैं। साँभर झील का तल समुद्र के तल से भी निचा हैं। यह राजस्थान की सबसे बड़ी प्राकृतिक व खारे पानी की झील हैं। बिजौलिया शिलालेख के अनुसार साँभर झील का निर्माता वासुदेव चैहान था। इस झील से देश का सर्वाधिक नमक लगभग 8.7 प्रतिशत प्राप्त किया जाता हैं। यहाँ ‘म्यूजियम साॅल्ट’ कि स्थापना कि गई। जिसे पर्यटन क्षैत्र में रामसर साइट के नाम से जाना जाता हैं। साँभर झील में नमक क्यारी पद्वति से बनाया जाता हैं। यहाँ केन्द्र सरकार द्वारा “हिन्दुस्तान साँभर साॅल्ट लिमिटेड“ की स्थापना 1964 में की गई।

पंचभद्रा झील

बालोतरा (बाड़मेर) में पंचा नामक भील ने दलदल सुखाकर इस झील का निर्माण किया था। वर्तमान यहाँ खारवाल जाति के लोग ‘मोरली झाड़ी’ से नमक बनाते हैं। यहाँ सर्वश्रेष्ठ किस्म का नमक बनाया जाता हैं। इस झील में सोडियम क्लोराइड कि मात्रा 98 प्रतिशत तक पाई जाती हैं। यह भारत की सबसे खारे पानी की झील हैं।

डीडवाना झील

यहाँ पर निजी संस्थाओं द्वारा नमक प्राप्त किया जाता हैं। इन निजी संस्थाओं को देवल कहते हैं। यहाँ के नमक में सर्वाधिक फ्लोराइड पाया जाता हैं। इसलिए यह नमक खाने योग्य नहीं हैं। यहाँ का नमक चमड़ा उधोग व कागज उधोग में उपयोगी हैं।

अन्य महत्वपूर्ण खारे पानी की झीलें एवं उनका स्थानः-

लूणकरणसर झील = बीकानेर

प्रीतमपुरी/पीथमपुरी झील, रेवासा झील एवं कोछोर झील = सीकर

बाप झील एवं फलौदी झील = जोधपुर

कछोर झील एवं कावोद झील = जैसलमेर

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