राजस्थान में नर्मदा, माही एवं चम्बल सिंचाई परियोजना

नर्मदा नहर परियोजना

यह परियोजना राजस्थान के बाड़मेर एवं जालौर जिले को जलापूर्ती करती हैं। यह परियोजना गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश एवं महाराष्ट्र की सयुंक्त परियोजना हैं। इस परियोजना को “सरदार सरोवर बाँध परियोजना और मारवाड़ की भागीरथी“ आदि नामों से जाना जाता हैं। इस परियोजना में राजस्थान का हिस्सा .50 एम.ए.एफ. हैं। यह राजस्थान की पहली परियोजना हैं, जिससे सम्पूर्ण सिंचाई फँवारा पद्वति/स्प्रिंकलर सिंचाई पद्वति से की जाती हैं। इस परियोजना के तहत सरदार सरोवर बाँध से नहरों के द्वारा राजस्थान में पानी लाया गया हैं। जिसमें से गुजरात में 458 किमी. व राजस्थान में 74 किमी. का निर्माण करवाया गया हैं। इस प्रकार परियोजना कि कुल लम्बाई 532 किमी. हैं। इस परियोजना के तहत सर्वप्रथम राजस्थान में सीलू गाँव (सांचैर तहसील, जालौर) में पानी 2008 को आया। इस परियोजना से जालौर एवं बाड़मेर जिलों को जलापुर्ती होती हैं।

माही बजाज सागर परियोजना

इस परियोजना का निर्माण मादी नदी पर किया गया हैं। यह राजस्थान व गुजरात की सयुंक्त परियोजना हैं। जिसमें राजस्थान का हिस्सा 45 प्रतिशत तथा गुजरात का 55 प्रतिशत हिस्सा हैं। इसमें से मिलने वाली 100 प्रतिशत बिजली राजस्थान को मिलेगी। इस परियोजना को 1971 में स्वीकृति मिली तथा 1983 में इंदिरा गाँधी ने इस सिंचाई परियोजना का शुभारम्भ किया। यह परियोजना आदिवासी क्षेत्र की सबसे बड़ी परियोजना हैं, जिसमें  सर्वाधिक लाभ बाँसवाड़ा जिले को मिलता हैं।

माही बजाज सागर बाँध

इसका निर्माण माही बजाज सागर परियोजना के प्रथम चरण में बांसवाड़ा की बोरखेड़ा तहसील के लोहरिया गाँव में किया गया। यह राज्य का सबसे लम्बा बाँध हैं। जिसकी लम्बाई 3109 मी. है। यहाँ 1986 में 50 मेगावाट विधुत का उत्पादन होता था। वर्तमान समय में यहाँ 140 मेगावाट विधुत का उत्पादन किया जाता हैं।

कागदी पिक अप बाँध

इसका निर्माण माही बजाज सागर परियोजना के द्वितीय चरण में किया गया। इस बाँध से दो नहरें निकलती हैं। जिसमें दाँई ओर भीखाभाई सागवाड़ा नहर एवं बाँई ओर आनन्दपुरी नहर निकलती हैं।

कड़ाना बाँध

यह बाँध भी माही बजाज सागर परियोजना पर ही स्थित हैं। परन्तु यह बाँध राजस्थान में न होकर गुजरात के माही जिले के रामपुरा गाँव में स्थित हैं। यह 100 प्रतिशत गुजरात की लागत पर बना हुआ हैं।

चम्बल नदी घाटी परियोजना

यह परियोजना मध्यप्रदेश व राजस्थान कि आधी-आधी (50-50 प्रतिशत) हैं। इसकी शुरूआत 1953-54 में कि गई थी। इसका निर्माण तिन चरणों में पुरा हुआ। इसमें कुल विधुत उत्पादन 386 मेगावाट होता हैं। जिसमें से 193 मेगावाट मध्यप्रदेश को व 193 मेगावाट राजस्थान को मिलता हैं। इस परियोजना में मिट्टी अपरदन को रोकने के कार्य को ‘रजाद कार्य‘ कहा जाता हैं।

कोटा सिंचाई बाँध

यह चम्बल नदी पर स्थित हैं।  इसे कोटा बैराज बाँध भी कहते हैं। यह चम्बल नद पर स्थित एक मात्र बाँध हैं, जिससे सिंचाई होती हैं। इसका चम्बल सभी बाँधों में सर्वाधिक केचमेन्ट एरिया हैं। इसमें कुल 8 नहरें हैं। जिसमें से दो नहरें कोटा व 6 नहरें बंारा में हैं।

जवाहर सागर बाँध

यह भी चम्बल नदी पर स्थित हैं। यह बाँध बोरावास (कोटा) में स्थित हैं।  यह एक पिकअप बाँध हैं।

राणाप्रताप सागर बाँध

यह भी चम्बल नदी पर स्थित हैं। यह बाँध रावत भाटा के चूलिया जल प्रपात के पास स्थित हैं। इसके ऊपर कनाड़ा के सहयोग से राजस्थान में प्रथम व देश का दूसरा परमाणु विधुत गृह बनाया गया हैं तथा प्रथम परमाणु विधुत गृह तारपुरा (महाराष्ट्र) में स्थित हैं। इस बाँध की भराव क्षमता सर्वाधिक हैं। जिसे 1970 में निर्मित कर राष्ट्र को समर्पित कर दिया गया हैं।

गाँधी सागर बाँध

यह बाँध राजस्थान के बहार मध्यप्रदेश के मंदसौर जिलमे में स्थित हैं।  इसका निर्माण प्रथम चरण 1959 में हुआ। इस पर कुल 115 मेगावाट विधुत उत्पन्न होती हैं।

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